Tuesday, December 3, 2013

दिल्ली विधानसभा चुनाव : नाचीज़ ही ना बना दे चीज़ो को नाचीज?

संजीव जैन
नई दिल्ली, दिल्ली के चुनावी दंगल में तमाम राजनीतिक पार्टियाॅं दस्साकसी में जुटी हैं, परन्तु कोई भी पार्टी अपनी नाक ऊॅंची रखने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) और ‘आप’ के मुखिया अरविंद केजरीवाल को तरजीह न देने का दिखावा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल को हीरों बनाने के लिए मीडिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। एक चैनल को सक्षात्कार में शीला दीक्षित ने कहा कि आप (मीडिया) लोग बिना वजह चीज़ को नाचीज़ बना रहे हैं। वहीं बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी हर्षवर्धन एवं प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल भी दिल्ली के चुनावों  में ‘आप’ की दावेदारी को सिरे से नकारते हुए नज़र आ रहे हैं। ऐसे ही कुछ हाल बसपा सुप्रीमो बहन मायावती की रैलियों में भी नज़र आ रहा है। साफ है कि कोई पार्टी अरविंद केजरीवाल या ‘आप’ को भाव न देकर उन्हें पब्लिसिटी नहीं देने को असफल प्रयास में जुटी हैं। हो ना हो इस रणनीति से वह अपनी नाक तो ऊॅची रख ही सकते हैं। परन्तु वास्तविकता क्या है इसका जवाब तो 4 दिसंबर को जनता ही दे पाएगी। चुनाव विशेषज्ञांे का मानना है कि चुनावों में ‘आप’ सीधे तौर पर कांग्रेस और भाजपा के समीकरण बिगाड़ रही है। यह समीकरण किस हद तक बिगड़तें है इसका इंतज़ार हर दिल्लीवासी को रहेगा।

दिल्ली विधानसभा चुनाव : ‘आप’ का जोर, भाजपा प्रत्याशी से निराश

सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र 
पूर्वी दिल्ली- जहां एक दिल्ली विधानसभा चुनावों का दंगल जोरों पर है वहीं दूसरी ओर दिल्ली जनता चुनाव आयोग बनाए कड़े नियम कायदों से कुछ राहत महसूस कर रहीं है। पर इन्हीं नियम कायदों के उम्मीदवारों की नाक नकेल डाल रखी है। हर राजनीतिक पार्टी इन नियम कायदों के रह कर अपने चुनाव प्रचार में जुटी है। चुनाव की इसी गहमा-गहमी के बीच हमारे संवाददाता राहुल जैन सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र चुनावी गहमा-गहमी की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। इस विधानसभा के अंतर्गत जी.टी.बी एन्क्लेव, दिलशाद गार्डन, ताहिरपुर, दिलशाद कालोनी, नन्द नगरी, सुंदर नगरी इत्यादि इलाके आते हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की बहुलता के चलते यह सीट अनुसूचित जाति उम्मीदवार के लिए आरक्षित रखी गई हैं। कांग्रेस के श्री वीर सिंह धिंगान इस क्षेत्र से अपनी जीत की हैटट्रिक लगा चुके हैं और उनकी कड़ी टक्कर मुख्यतः आम आदमी पार्टी के युवा एवं जुझारू उम्मीदवार श्री धर्मेन्द्र कोली से है। 



कांग्रेस और भाजपा के खेमे में सेंध लगा रहे युवा धर्मेन्द्र कोली
कहा जाता है कि किस्मत का लिखा कोई नहीं बदल सकता। इसका उदाहरण है धर्मेन्द्र कोली को टिकट मिलना। आम आदमी पार्टी द्वारा पहले यह टिकट श्री धर्मेन्द्र कोली की स्वर्गीय बहन संतोष कोली को दिया गया था। परन्तु उनकी एक दुर्घटना में अकस्मात मृत्यु के पश्चात पार्टी ने यह टिकट धर्मेन्द्र को दिया। श्री धर्मेन्द्र खुद सुन्दर नगरी ‘एफ’ ब्लाक के निवासी हैं और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के सुन्दर नगरी में भूख हड़ताल पर बैठने के दौरान वह बहुत ही एक्टिव रहे, जिससे उनकी पहचान अनुसूचित जाति के वोटरों और क्षेत्र की अन्य जनता के बीच और भी गहरी हो गई। अनुसूचित जाति बहुलता वाले इलाके सुंदर नगरी मंे अच्छी पैठ से वे वीर सिंह धिंगान के वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगाएंगे। साथ ही ईमानदार पार्टी की विचारधारा से जुडे़ होने के कारण उन्हे बाकी इलाकों से भी अच्छे खासे वोट मिलने की उम्मीद है।


मजबूरी का नाम रामपाल
क्षेत्र में इस बार भाजपा के उम्मीदवार श्री रामपाल सिंह को लेकर किसी भी तरह को उत्साह नहीं देखने में आता है। यहां तक की पार्टी के जुडे जमीनी कार्यकर्ता भी मजबूरी समझ कर उनके साथ प्रचार में लगे हैं, परन्तु मजबूरी के चलते कार्यकर्ताओं के उत्साह में भारी कमी दिखाई पड़ती है। जो भी कार्यकर्ता उनकी रैलियों में जुडें हैं वे जिलाध्यक्ष श्री अनिल गुप्ता, उनकी पत्नी एवं पार्षद श्रीमती स्वाती गुप्ता की साख एवं सपोर्ट के चलते हैं।  इसके अलावा क्षेत्र की जनता में श्री रामपाल सिंह की ज़रा भी पहचान न होना भाजपा के लिए खतरे की घंटी बन सकता है। साथ ही कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा उम्मीदवार व्यवहार कुशल भी नहीं हैं और उनके साथ प्रचार में लगे कुछ लोग तो शालीनता से कोसों दूर हैं। कुल मिलाकर यहां स्थिति असमंजस कीं बनती नज़र आ रही है।

धिंगान पर भारी महंगाई

श्री वीर सिंह धिंगान 1998 में पहली बार जीत कर क्षेत्र में चुन कर आए और 2008 में जीत कर उन्होंने अपनी हैटट्रिक पूरी की। अपनी लगातार जीत के चलते उन्हें दिल्ली खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड का चेयरमैन भी नियुक्त किया गया। श्री धिंगान लगातार क्षेत्र में डटे रहने के कारण एक अच्छा जनसम्पर्क नेटवर्क और क्षेत्र की जनता में अपनी पहचान रखते हैं। उनके द्वारा 15 साल में कराए गए कुछ महत्वपूर्ण विकासीय कार्यों को जनता नहीं नकारती। परन्तु क्षेत्र के पार्कों में फव्वारों के निर्माण के नाम पर बेकार किए गए फंड, क्षेत्र में धडल्ले से हुए अवैध निर्माण, पार्किंग की जबरदस्त किल्लत, पेयजल किल्लत के चलते इस बार क्षेत्र के निवासी उनसे रूठे हुए नज़र आते हैं। इसके अलावा इस बार पार्टी के कार्यकर्ता की बेरूखी भी उन्हें भारी पड़ सकती है। इसके अलावा उनके विरोधी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार श्री धर्मेन्द्र कोली ने अनुसूचित जाति बहुलता वाले इलाके सुंदर नगरी, नंद नगरी इत्यादि में बहुत ही मजबूत पकड़ बना ली है क्योंकि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल कुछ समय पहले बिजली के बढ़े बिलो को लेकर सुन्दर नगरी में ही भूख हड़ताल पर बैठे थे। जिससें श्री धिंगान के वोट बैंक अच्छी खासी सेंध लगी है। ऊपर से महंगाई, बिजली-पानी के बढ़े बिलों जैसे राज्य स्तरीय मुद्दे भी आग में घी का काम करेंगे। परन्तु भाजपा के कमजोर उम्मीदवार के चलते उन्हे इसका कुछ लाभ मिल सकता है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव : डाक्टर साहब की कड़ी परीक्षा

जीटीबी संवाददाता
नई दिल्ली, ईस्ट दिल्ली की लक्ष्मी नगर सीट की चुनावी तस्वीर कैसी है, इस पर सबसे पहले पांडव नगर इलाके की एक गली में केलेे बेच रहे सुनील की राय सुनिए। सुनील का कहना है कि महंगाई ने लोगों का बुरा हाल कर रखा है और इस बार कांग्रेस को यहां अपनी सीट बचाने के लिए नाकों चने चबाने पड़ेंगे। हालांकि डाॅक्टर साहब
(डाॅ. ए. के. वालिया) को इधर के लोग काफी पसंद करते हैं।
अब देखना यह है कि कहीं यह नाराजगी डाॅक्टर साहब को भारी तो नहीं पड़ जाएगी। वहीं सुनील से केलेेे खरीद रहे जूलर मनीष पुरी कहते हैं हमारा पूरा परिवार शुरू से ही कांग्रेस का समर्थक रहा है, लेकिन इस बार यहां सबकी हवा टाइट है। कोई भी यकीन के साथ जीत का दावा नहीं कर सकता। हालांकि यहां का बच्चा-बच्चा डाॅक्टर साहब को जानता है, लेकिन आम आदमी पार्टी को भी लोग काफी सपोर्ट कर रहे हैं। हालांकि आप कैंडिडेट विनोद कुमार बिन्नी खिचड़ीपुर के रहने वाले हैं, लेकिन यहां उन्होंने कम समय में अच्छी पकड़ बना ली है।
थोड़ा आगे चले तो चंद्र प्रभा मिलीं, जिन्हें इस बात की नाराजगी थी कि दिल्ली सरकार और एमसीडी दोनों ही बुजुर्गों को पेंशन देने की बात कहकर वाहवाही तो बहुत लूटते हैं, लेकिन असल में बुजुर्गों को टाइम पर पेंशन मिल ही नहीं और मिलती भी है तो पूरी नहीं मिलती। उनका सवाल था कि जब कांग्रेस और बीजेपी दोनों जनता के हित की बात करते हैं, तो फिर दिल्ली सरकार और एमसीडी की पेशंन के अमाउंट में फर्क क्यों है। उनका कहना था कि डाॅक्टर साहब की रेपुटेशन भले ही अच्छी है, लेकिन यह भी सच है कि यहां बुजुर्गों को सरकारी पेंशन के मामले में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और वोटिंग करते वक्त हम इस बात को ध्यान में रखकर वोट करेंगे।
अब सुनिए गृहणियों का क्या कहना है। पांडव नगर में रहने वाली टीना वालिया का कहना है कि महंगाई ने हमारा माइंड वाॅश कर दिया है। पुलिस पैसे लिए बिना स्नैचिंग का केस दर्ज नहीं करतीं। मैंने तो तय कर लिया है कि इस बार में नोटा का बटन ही दबाऊंगी। उन्हीं के साथ मौजूद सुनीता और हरप्रीत का कहना था कि हमें तो आम आदमी पार्टी पर भी कोई भरोसा नहीं है। आप के उम्मीदवारों पर हुए स्टिंग के केस के बाद तो हमारा भरोसा और उठ गया है। इलाके के विकास के सवाल पर जितेंद्र कौर अनीता चुटकी लेते हुए कहती हैं कि हां, हमारे इलाके में विकास हुआ है ना। अभी तीन महीने पहले यहां एक नई डिस्पेंसरी खुली है और 5 साल में पहली बार नई रोड बनी है। बाकी सफाई का हाल तो आप देख ही रहे और स्ट्रीट लाइट का हाल रात को आकर देख लेना।
स्कूल ब्लाॅक के एक किराना व्यापारी सुभाष जैन से मुलाकात हुई। जैन साहब ने एक लाइन में बता दिया कि अगर डाॅक्टर वालिया कांग्रेस के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ते, जो जरूर जीत जाते। लोगों में काफी गुस्सा है और बीजेपी को इसका फायदा मिलेगा। अगर एक मिनिस्टर अपने विधानसभा क्षेत्र के 4 में से एक वाॅर्ड में भी कांग्रेस उम्मीदवार को नहीं जिता सकता, तो इससे जनता का मूड समझा जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनके घर में पानी का बिल 9 हजार रुपये आया है और उस बिल ने कांग्रेस के प्रति रही सही हमदर्दी भी उनके मन से खत्म कर दी है।
हालांकि प्रीत विहार में रहने वाले व्यवसायी पुनीत मनचंदा का मानना है कि इस इलाके में पिछले 10-15 सालों में बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट हुआ है, लेकिन पार्किंग, पानी और सीवर की समस्या से लोग खासे परेशान हैं। बावजूद इसके डाॅक्टर साहब की अच्छी इमेज सीट बचाने में उनके लिए मददगार साबित होगी। लोग व्यक्तिगत रूप से उन्हें पसंद करते हैं और इसी आधार पर उन्हें वोट करेंगे। इसके बाद हम पहुंचते हैं रमेश पार्क इलाके में शकरपुर थाने के ठीक पीछे बने एक बस्ती में, जहां मुस्लिम बहुत आबादी है। यहां रहने वाले हकीकत उल्लाह का कहना था कि इस बार आम आदमी पार्टी की तरफ से डाॅक्टर साहब को कड़ी टक्कर मिलने वाली है। हालांकि डाॅक्टर साहब की छवि इतनी साफऊ है कि अगर वो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव ना भी लड़ें, तो जीत जाएं लेकिन इस बार लोग कांग्रेस से खासे खफा हैं और इसका नुकसान डाॅक्टर साहब को झेलना पड़ सकता है।
बिजली, पानी, गैस सिलिंडर, पेट्रोल, अनाज, दूज, सब्जियां सब इतने महंगे हो गए हैं कि आम आदमी के लिए कुछ बचा पाना तो दूर घर चलाना मुश्किल हो रहा है। उधर आसिफ अली का कहना था अगर बीजेपी अभय वर्मा के बजाय बी बी त्यागी को खड़ा करती, तो वो डाॅक्टर वालिया को और अच्छी टक्कर देते। अब इसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिलेगा। उन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं और मुस्लिमों का वोट इस बार कांग्रेस और आप के बीच बंटेगा।